ज्योतिर्लिंग क्यों कहा जाता है?

- पुराणों और अन्य हिंदू धर्म शास्त्रों में ज्योतिर्लिंगों को भगवान शिव की ऊर्जा का प्रतीक माना गया है. ज्योतिर्लिंग एक संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ होता है ‘रोशनी का प्रतीक’. इस ज्योतिर्लिंग में दो शब्द हैं. पहला ज्योति और दूसरा लिंग. लिंग शब्द का मतलब है आकार. यह आकार इसलिए है क्योंकि जो अप्रकट है वो खुद को जब प्रकट करने लगता है।

- एक अन्य शब्द में कह सकते है कि जब सृष्टि की उत्पत्ति शुरु हुई तो जो सबसे पहला आकार इसने लिया था, वो एक दीर्घवृताकार था. एक पूर्ण दीर्घवृताकार को लिंग कहते हैं ।

- पुराणों और धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक इन 12 स्थानों पर जो शिवलिंग मौजूद हैं उनमें ऊपर ज्योति के रूप में स्वयं भगवान शिव विराजमान हैं. यही कारण है कि इन्हें ज्योतिर्लिंग कहा जाता है।
ज्योतिर्लिंग की उत्पत्ति कैसे हुई है?
- हिंदू मान्यता के अनुसार ज्योतिर्लिंग कोई सामान्य शिवलिंग नहीं है. ऐसा कहा जाता है कि इन सभी 12 जगहों पर भोलेनाथ ने खुद दर्शन दिए थे, तब जाकर वहां ये ज्योतिर्लिंग उत्पन्न हुए ।
- पुराणों में कहा गया है कि जब तक महादेव के इन 12 ज्योतिर्लिंग के दर्शन नहीं कर लेते, आपका आध्यात्मिक जीवन पूर्ण नहीं हो सकता ।
ज्योतिर्लिंग की मान्यता
- शिव पुराण के अनुसार, भगवान शिव लोक कल्याण के लिए लिंग के रूप में वास करते हैं और भगवान शिव के बारह विग्रहों को द्वादश ज्योतिर्लिंग कहा जाता है।
- श्रावण माह में ज्योतिर्लिंगों के दर्शन और पूजन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़ते हैं। मान्यता है कि भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग के दर्शन मात्र से ही सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

- सावन या श्रावण (Shrawan Mass) के पवित्र महीने को भगवान शिव (Lord Shiva) का मास भी कहा जाता है. इस पूरे महीने शिवालयों में भगवान शिव की पूजा अर्चना होती है. खासकर सोमवार को व्रत रखा जाता है.
पहला ज्योतिर्लिंग कौन सा है?
- भारतवर्ष में यह 12 ज्योतिर्लिंग अलग-अलग स्थानों पर स्थित हैं। इनमें सर्वप्रथम श्री सोमनाथ जी का स्मरण किया जाता है।
- सोमेश्वर या सोमनाथ (प्रभास तीर्थ) (Somnath) पहला ज्योतिर्लिंग हैं।
- यह गुजरात के वीरावल जिले के प्रभास पाटन में स्थित है।

शिवलिंग और ज्योतिर्लिंग में क्या अंतर है ?
- शिवपुराण में एक कथा है, जिसके अनुसार एक बार सृष्टिकर्ता ब्रह्मा और जगतपालक विष्णु में विवाद हुआ कि उनमें श्रेष्ठ कौन है?
- तब उन दोनों का भ्रम समाप्त करने के लिए शिव एक महान ज्योति स्तंभ के रूप में प्रकट हुए, जिसके तेज को ये दोनों देख नहीं पाये । इसी को ज्योतिर्लिंग कहा जाता है।
- वहीं जूसरी ओर लिंग का अर्थ होता है प्रतीक, यानि शिव के ज्योति रूप में प्रकट होने और सृष्टि के निर्माण का प्रतीक। ज्योतिर्लिंग सदैव स्वयंभू होते हैं जबकि शिवलिंग मानव द्वारा स्थापित और स्वयंभू दोनों हो सकते हैं।
- ज्योतिर्लिंग सदैव स्वयंभू होते हैं जबकि शिवलिंग मानव द्वारा स्थापित और स्वयंभू दोनों हो सकते हैं।
- हिंदू धर्मग्रंथों में शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों का उल्लेख मिलता है।
शिवलिंग के कितने भाग होते हैं ? और कौन सा हिस्सा किसका प्रतीक हैं?
शिवलिंग का भी अपना एक विज्ञान है शिवलिंग के तीन हिस्से होते हैं.
- पहला हिस्सा जो नीचे चारों ओर भूमिगत रहता है. दूसरा बीच का हिस्सा और तीसरा शीर्ष सबसे ऊपर जिसकी पूजा की जाती है।
- निचला हिस्सा ब्रह्मा जी ( सृष्टि के रचयिता ), मध्य भाग विष्णु ( सृष्टि के पालनहार ) और ऊपरी भाग भगवान शिव ( सृष्टि के विनाशक ) हैं।

- शिवलिंग की ऊंचाई संपूर्ण मंडल या परिधि की एक तिहाई होती है
- शिव के माथे पर तीन रेखाएं (त्रिपुंड) और एक बिंदू होता है
भारत में कितने ज्योतिर्लिंग है ? और कहां कहां पर है?
- भारत में स्थित 12 ज्योतिर्लिंग के नाम और स्थान नीचे की तालिका में दिए हए हैं
- ज्योतिर्लिंग के बारे में पूरी जानकारी पाने के लिए ज्योतिर्लिंग के नाम पर क्लिक करे।
- इन तीर्थस्थलो पर पहुंचने के आसान रास्तों के बारे में जानने के लिए नीचे Click here पर क्लिक करे।
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भारत में स्थित 12 ज्योतिर्लिंग |
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क्रम |
ज्योतिर्लिंग नाम | ज्योतिर्लिंग स्थान |
कैसे पहुंचे ? |
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1 |
सोमेश्वर या सोमनाथ (प्रभास तीर्थ) (Somnath) |
गुजरात राज्य -वीरावल जिला , स्थान प्रभास पाटन | Click here |
| 2 | श्रीशैलम मल्लिकार्जुन (दक्षिण का कैलाश) (Mallikarjuna) | आन्ध्र प्रदेश राज्य -कृष्णा जिले | Click here |
| 3 | महाकालेश्वर या महाकाल (Mahakaleshwar ) | मध्य प्रदेश – उज्जैन जिला | Click here |
| 4 | ओंकारेश्वर (Omkareshwar) | मध्य प्रदेश – खंडवा जिला | Click here |
| 5 | केदारेश्वर या केदारनाथ (Kedareshwar) | उत्तराखंड राज्य – रुद्रप्रयाग जिला | Click here |
| 6 | भीमाशंकर (Bhimashankar) | महाराष्ट्र राज्य -खेड तालुका (राजगुरुनगर) | Click here |
| 7 | विश्वेश्वर (Vishweshwar) | उत्तर प्रदेश- वाराणसी (काशी ) | Click here |
| 8 | त्र्यम्बकेश्वर (Tryambakeshwar) | महाराष्ट्र राज्य – नासिक जिला | Click here |
| 9 | वैद्यनाथ महादेव (Vaidyanatha) | झारखण्ड राज्य देवघर जिला | Click here |
| 10 | नागेश्वर महादेव (Nageshvar ) | गुजरात राज्य – देवभूमि द्वारिका जिला | Click here |
| 11 | रामेश्वरम या सेतुबन्ध तीर्थ (Rameswaram ) | तमिलनाडु राज्य – रामनाथपुरम जिला | Click here |
| 12 | घुष्मेश्वर या घृष्णेश्वर (Grishneshwar ) | महाराष्ट्र राज्य में औरंगाबाद जिला | Click here |
शिवपुराण कोटिरुद्रसंहिता : द्वादश ज्योतिर्लिंगों वर्णन | दर्शन-पूजन महिमा

अर्थ –
जो निर्विकार होते हुए भी अपनी माया से ही विराट् विश्व का आकार धारण कर लेते हैं, स्वर्ग और अपवर्ग (मोक्ष) जिनके कृपा-कटाक्ष के ही वैभव बताये जाते हैं तथा योगी जन जिन्हें सदा अपने हृदय के भीतर अद्वितीय आत्मज्ञाना आनंद –स्वरूप में देखते हैं, उन तेजोमय भगवान् शंकरको, जिनका आधा शरीर शैल राजकुमारी पार्वती से सुशोभित है, निरन्तर मेरा नमस्कार है॥
भगवान शिव की आरती | Shivji ki Aarti | Om Jai Shiv Omkara

- ओम जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा। ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥ओम जय शिव ओंकारा॥
- एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे। हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे॥ ओम जय शिव ओंकारा॥
- दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे। त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे॥ ओम जय शिव ओंकारा॥
- अक्षमाला वनमाला मुण्डमालाधारी। त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी॥ ओम जय शिव ओंकारा॥
- श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे। सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे॥ ओम जय शिव ओंकारा॥
- कर के मध्य कमण्डलु चक्र त्रिशूलधारी। सुखकारी दुखहारी जगपालनकारी॥ ओम जय शिव ओंकारा॥
- ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका। मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥ ओम जय शिव ओंकारा॥
- लक्ष्मी, सावित्री पार्वती संगा। पार्वती अर्द्धांगी, शिवलहरी गंगा॥ ओम जय शिव ओंकारा॥
- पर्वत सोहैं पार्वती, शंकर कैलासा। भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा॥ ओम जय शिव ओंकारा॥
- जटा में गंग बहत है, गलमुण्डन माला। शेष नाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला॥ओम जय शिव ओंकारा॥
- काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी। नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी॥ओम जय शिव ओंकारा॥
- त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोइ नर गावे। कहत शिवानन्द स्वामी, मनवान्छित फल पावे॥ ओम जय शिव ओंकारा॥ ओम जय शिव ओंकारा॥
12 ज्योतिर्लिंग श्लोक
- सौराष्ट्र प्रदेश में श्री सोमनाथ, श्रीशैल पर श्री मल्लिकार्जुन,
- उज्जयिनी में श्री महाकाल,ओंकारेश्वर में अमलेश्वर (अमरेश्वर)
- परली में वैद्यनाथ,डाकिनी नामक स्थान में श्रीभीमशंकर,
- सेतुबंध पर श्री रामेश्वर,दारुकावन में श्रीनागेश्वर
- वाराणसी (काशी) में श्री विश्वनाथ,गौतमी (गोदावरी) के तट पर श्री त्र्यम्बकेश्वर,
- हिमालय पर श्रीकेदारनाथ औरशिवालय में श्री घृष्णेश्वर को स्मरण करें।
- जो मनुष्य प्रतिदिन, प्रातःकाल और संध्या समय, इन बारह ज्योतिर्लिंगों का नाम लेता है,
- उसके सात जन्मों के पाप इन लिंगों के स्मरण-मात्र से मिट जाते है।
द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र – अर्थसहित
श्री सोमनाथ ज्योतिर्लिंग-1

- जो अपनी भक्ति प्रदान करनेके लिये अत्यन्त रमणीय तथा निर्मल सौराष्ट्र प्रदेश में दयापूर्वक अवतीर्ण हुए हैं।
- चन्द्रमा जिनके मस्तकका आभूषण है, उन ज्योतिर्लिंगस्वरूप भगवान् श्रीसोमनाथकी शरणमें मैं जाता हूँ ॥
श्री मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग-2


- जो ऊँचाईके आदर्शभूत पर्वतोंसे भी बढ़कर ऊँचे श्रीशैलके शिखरपर, जहाँ देवताओंका अत्यन्त समागम होता रहता है , प्रसन्नतापूर्वक निवास करते हैं ।
- जो संसार-सागरसे पार करानेके लिये पुल के समान हैं, उन एकमात्र प्रभु मल्लिकार्जुन को मैं नमस्कार करता हूँ॥
श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग-3


- संतजनोंको मोक्ष देनेके लिये जिन्होंने अवन्तिपुरी (उज्जैन) में अवतार धारण किया है ।
- उन महाकाल नामसे विख्यात महादेवजीको मैं अकालमृत्युसे बचनेके लिये नमस्कार करता हूँ॥
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग-4


- जो सत्पुरुषोंको संसार-सागरसे पार उतारनेके लिये कावेरी और नर्मदाके पवित्र संगमके निकट ,
- सदा मान्धाता के पुर में निवास करते हैं । उन अद्वितीय कल्याणमय भगवान् ॐकारेश्वर की स्तुति करता हूँ।
श्री वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग-5


- जो पूर्वोत्तर दिशामें चिताभूमि (वैद्यनाथ-धाम) के भीतर सदा ही गिरिजाके साथ वास करते हैं,
- देवता और असुर जिनके चरण कमलोंकी आराधना करते हैं, उन श्रीवैद्यनाथको मैं प्रणाम करता हूँ॥
श्री नागेश्वर ज्योतिर्लिंग-6


- जो दक्षिणके अत्यन्त रमणीय सदंग नगरमें , विविध भोगोंसे सम्पन्न होकर , सुन्दर आभूषणोंसे भूषित हो रहे हैं,
- जो एकमात्र सदभक्ति और मुक्तिको देनेवाले हैं, उन प्रभु श्रीनागनाथकी मैं शरणमें जाता हूँ॥
श्री केदारनाथ ज्योतिर्लिंग-7


- जो महागिरि हिमालयके पास केदारशृंगके तटपर सदा निवास करते हुए मुनीश्वरोंद्वारा पूजित होते हैं
- देवता, असुर, यक्ष और महान् सर्प आदि भी जिनकी पूजा करते हैं, उन एक कल्याणकारक भगवान् केदारनाथका मैं स्तुति करता हूँ॥
श्री त्र्यम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग-8


- जो गोदावरी तट के पवित्र देश में सह्यपर्वत के विमल शिखरपर वास करते हैं,
- जिनके दर्शनसे तुरंत पातक (नरक में गिरानेवाला पाप) नष्ट हो जाता है, उन श्रीत्र्यम्बकेश्वरका की मैं स्तुति करता हूँ। ॥
श्री रामेश्वर ज्योतिर्लिंग-9


- जो भगवान् श्रीरामचन्द्रजी के द्वारा , ताम्रपर्णी और सागरके संगम पर , अनेक बाणों द्वारा पुल बाँधकर स्थापित किये गये हैं, उन श्रीरामेश्वरको मैं नियमसे प्रणाम करता हूँ॥
श्री भीमांशंकर ज्योतिर्लिंग-10


- जो डाकिनी और शाकिनी वृन्द में प्रेतों द्वारा सदैव सेवित होते हैं, उन भक्तहितकारी भगवान् भीमशंकरको मैं प्रणाम करता हूँ॥
श्री विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग-11


- जो स्वयं आनन्दकन्द हैं और आनन्दपूर्वक आनन्दवन (काशीक्षेत्र) में वास करते हैं,
- जो पापसमूह को नाश करने वाले हैं, उन अनाथों के नाथ काशीपति श्रीविश्वनाथकी शरणमें मैं जाता हूँ॥
श्री घुश्मेश्वर ज्योतिर्लिंग-12


- जो इलापुर के सुरम्य मन्दिर में विराजमान होकर समस्त जगत के आराधनीय रहे हैं,
- जिनका स्वभाव बड़ा ही उदार है, उन घृष्णेश्वर नामक ज्योतिर्मय भगवान् शिवकी शरणमें मैं जाता हूँ॥

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