कर्म के नियम को विधि और प्रभाव का नियम भी कहा जाता है।
कार्रवाई और प्रतिक्रिया: जैसा कि आप बोते हैं, वैसा ही आप काटेंगे।
आप परिणामों को नियंत्रित नहीं कर सकते, केवल अपने कार्यों को कर सकते हो।
अच्छा करो और अच्छा तुम्हारा पीछा करेगा।
भाग्य हमारे कर्म पर निर्भर करता है। हर कोई अपने भाग्य के लिए जिम्मेदार है!
जैसा जाएगा वैसा ही आएगा। दूसरों के साथ वैसा करें जैसा आप स्वयं प्राप्त करना चाहते हैं।
किसी दिन लोग मुझसे पूछेंगे कि मेरी सफलता की कुंजी क्या है, और मैं बस कहूंगा, “अच्छा कर्म”।
कर्म, अगर सीधे शब्दों में कहें, एक क्रिया है : अच्छा या बुरा।
मेरे जीवन में अभी जो कुछ भी हो रहा है वह अतीत में मेरे ही कर्मों का परिणाम है।इसलिए,
वर्तमान में केवल सर्वश्रेष्ठ का चयन करें ताकि आपका भविष्य आपके जैसा ही सुंदर हो।
बेकार लोग अपने कर्म को दोष देते हैं।
कर्म के क्षेत्र में जो जैसा रोपता है, वह वैसा ही काटता है।
जो आदमी दूसरों को बीमार करता है, वह खुद भी उसे भुगतेगा।
जब एक पक्षी जीवित होता है तो वह चींटियों को खा जाता है जब पक्षी मर जाता है चींटियाँ पक्षी को खा जाती हैं। समय और परिस्थिति किसी भी समय बदल सकते हैं या किसी को चोट पहुँचा सकते हैं। इसलिए अच्छे बनो और अच्छा करो।
आप सभी से छुपा सकते हैं। लेकिन फिर भी, कर्म आपको देख रहा है।
कर्म चाहे अच्छा हो या बुरा हम अपने जीवन में जो करते हैं उसका परिणाम है। कुछ लोग कहते हैं कि यह हमारे लिए दर्पण है जो हमने दूसरों के साथ किया है।
कर्म हमारे स्वयं के कर्मों का वास्तविक जीवन है।
हमें हमेशा यह याद रखना चाहिए कि हम जो कुछ भी करते हैं, उसके परिणाम हमारी प्रतीक्षा करते हैं।
आपके द्वारा की जाने वाली प्रत्येक क्रिया के प्रति सावधान रहें। दूसरों के खिलाफ कुछ भी अच्छा या बुरा करने से पहले जितना संभव हो सके सोचें, क्योंकि कर्म बस अपनी बारी का इंतजार कर रहा है।
कर्म हमें वह देने में कभी असफल नहीं होते जिसके हम हकदार हैं
कभी भी अन्य की भावनाओं के साथ न खेलें क्योंकि आप नहीं जानते कि कर्म कैसे खेल खेलते हैं।
हर किसी के साथ अच्छा व्यवहार करें और हर अच्छी चीजों की उम्मीद करें।
कर्म उन लोगों को कभी नहीं भूलता है जो उसकी सूची में शामिल हैं। यदि यह आज नहीं है, तो किसी और दिन इसकी उम्मीद करें।

हर किसी को कर्म भोगना पड़ता है अच्छा या बुरा कर्म की पहचान समय ख़ुद देता है।जो विद्याएं कर्म का सम्पादन करती है, उन्ही का फल दृष्टिगोचर होता है.
कर्म से ही विजय है भाग्य भी कर्म पर निर्भर है कर्म है तो सफलता तय है।कर्म ही धर्म का दर्शन है.
क्या मिलना है ये कर्म की बात है, क्या लेना है ये धर्म की बात है।

कर्म का सब खेल है यह लौट कर तो आएगा जो आज तुझे रुला रहा कल,कोई और उसे रुलाएगा
अपने कर्म से दोस्ती कर लीजिये, आप बहुत फायदे में रहेंगे.जो काम आ पड़े, साधना समझ कर पूरा करो।
कर्म जीवन का मुख्य विषय हैं, शब्दों का हेर फेर भले ही पकड़ नहीं आता हैं, पर सच में, हर कोई कर्म से पहचाना जाता हैं ।

भलाई का एक छोटा सा काम हजारों प्रार्थनाओं से बढकर है ।
हर व्यक्ति को उसके कर्म करने की पूरी आज़ादी है लेकिन कर्म के परिणामों में चुनाव, उसके हाथ में नही।
सफलता हमारा परिचय दुनियां को करवाती है और असफलता हमें दुनियां का परिचय करवाती है ।जिस दिन आप अपने लिए बोलना शुरू करेंगे, दुनिया आपके पीछे से हटकर आपके सामने खड़ी हो जाएगी।।
कर्म वो आइना है जो हमारा असली चेहरा हमें दिखा देता है।
कर्मो से डरिये ईश्वर से नहीं… ईश्वर माफ़ कर देता है कर्म नहीं ।

मनुष्य जब असाधारण कार्य कर दिखाता है, वह यश का कारण बन जाता हैं
कर्म ही पूजा है और कर्तव्य- पालन भक्ति है।
जो कार्य जितनी श्रद्धा से किया जायेगा, उतना ही श्रेष्ठ होगा.
काम करने से पहले सोचना बुद्धिमानी,
काम करते हुए सोचना सतर्कता
और काम करने के बाद सोचना मूर्खता है.
कर्म करने पर ही तुम्हारा अधिकार है, फल में नहीं.
तुम कर्मफल का कारण मत बनो और अपनी प्रवृति कर्म करने में रखो.
कोई भी व्यक्ति किसी कार्य को सर्वोत्तम ढंग से करना चाहता है तो उसे अपनी सम्पूर्ण योग्यता पूरी सामर्थ्य उसमें लगा देनी चाहिए.

कर्म जीवन में आनंद देता है और दुःखो को भूलने का साधन बनता है.
जो सिर्फ काम की बात करते हैं, वे अवश्य सफल होते हैं.
कर्म के दर्पण में व्यक्तित्व का प्रतिबिंब झलकता है.
कठोर श्रम की इच्छा एवं शक्ति का दूसरा नाम प्रतिभा है.
कर्म के द्वारा मौन रहते हुए चींटी से अच्छा उपदेश कोई दूसरा नहीं देता.

कर्मयोगी भाग्य का निर्माण स्वयं करते है. कर्महीन ही भाग्य को कोसते हैं.
काम करने वाला मरने से कुछ घंटे पूर्व ही बूढ़ा होता है.
कर्म से आदमी ऊँचा नीचा होता है. प्रभु सबको उसके कर्मफल से ऊँचा पद व मान मर्यादा देते हैं.
किया हुआ कर्म और बोया हुआ बीज उचित समय लेता ही है.
उत्तम पुरूषों की यह रीति है कि वे किसी भी कार्य को अधूरा नहीं छोड़ते.

अधूरा काम और अपराजित शत्रु दोनों ही बुझी चिंगारी के समान है.
आत्मा जिस कार्य को करने में सहमत न हो, उस कार्य को करने में शीघ्रता न करो.
इस पृथ्वी पर साधन करने से सभी काम सफल होते हैं.
मनुष्य जब असाधारण कार्य कर दिखाता है, वह यश का कारण बन जाता हैं.
जैसा आप सोचोगे,बोलोगे,और काम करोगे, वैसा ही आपको वापस मिलेगा, इसलिए अच्छा सोचो,अच्छा बोलो और अच्छा काम करो, यही कर्म है।

कर्म है जनाब, जो जैसा करेगा वह वैसा ही भरेगा।
भगवान ने हाथ किसी को लकीरें दिखाने के लिए नहीं बल्कि, अपनी मेहनत का जलवा दिखाने के लिए दिए हैं।
अगर आप किसी और के साथ गलत करने जा रहे हो, तो अपनी बारी का इंतज़ार भी जरूर करना।
मुसीबतें चाहे जितनी मर्ज़ी हो हर कदम पर,
तू घबरा कर मत बैठ तू बस अपना कर्म कर।

अच्छे लोगो की इज्जत कभी कम नहीं होती, सोने के सौ टुकड़े करो, फिर भी कीमत कम नहीं होती।
वक़्त वक़्त की बात है, कल तुम मेरे पास थे,
आज कोई और तुम्हारे साथ है,
फिर कोई और उसके साथ होगा,
और फिर तुम्हारा भी हाल मेरे जैसा होगा।
ईमानदारी और बुद्धिमानी से किया गया काम कभी व्यर्थ नहीं जाता।
कर्म जो किसी के भले के लिए किये जा रहे हो, उनका परिणाम कभी बुरा नहीं हो सकता।
किसी ने आप के साथ बुरा किया है, तो छोड़ दो उसे आगे बढ़ो, उसका कर्म स्वंय उसको सजा देगा।
अगर आप जरूरतमंद लोगों की मदद करते हैं, तो भगवान भी आपकी मदद करता है।

जिंदगी में जो कर्म करते हैं, अच्छा या गलत, उससे ही भविष्य का जन्म होता है।
वर्तमान को अपने कर्मों से अच्छा बनाओ, ताकि आपका भविष्य भी आपके जैसा अच्छा हो।
इंसान सब कुछ कापी कर सकता है लेकिन क़िस्मत और नसीब नही।
तूफ़ान जीवन में सिर्फ़ अस्त–व्यस्त करने नही आते, कुछ आपकी मंज़िलो के रास्ते साफ़ करने भी आते है।
दूसरों के अनुसार खुद को न बदलें। मुसीबतें चाहे जितनी मर्ज़ी हो हर कदम पर तू घबरा कर मत बैठ तू बस अपना कर्म कर।
बस एक बात याद रखें कि यह आपके और दूसरों के बीच नहीं है और यह हमेशा आपके और भगवान के बीच है।
टूटा हुआ विश्वास और छूटा हुआ बचपन, ज़िंदगी में दुबारा वापस नहीं मिलता।
दूसरा मौक़ा, सिर्फ़ कहानियाँ देती है ज़िंदगी नही।

क़िस्मत भी उनका साथ देती है जिनके कर्म मज़बूत होते है।
कर्म वो आइना है जो हमारा असली चेहरा हमें दिखा देता है।
सफल होना चाहते हो तो फल की नहीं अपने कर्म की चिंता करनी होगी।
अच्छे कर्म और अच्छी बातें एक दिन आपके पास ज़रूर वापिस आती है।

कर्म का सब खेल है यह लौट कर तो आएगा जो आज तुझे रुला रहा कल, कोई और उसे रुलाएगा ईश्वर ना दंड देता है ना माफ़ करता है, कर्म का फल हमारे सुख दुःख का कारण बनता है।
लोग आपके साथ कैसा व्यवहार करते हैं यह उनका कर्म है।

जीवन ख़त्म होने के पश्चात आपका धर्म क्या है ईश्वर नहीं देखेगा, ईश्वर बस आपके कर्म देखेगा।
ज़्यादा समझदार और मूर्ख में कोई फ़र्क़ नही होता, ये दोनो किसी की नहीं सुनते।
कर्म वो आइना है जो हमारा , असली चेहरा हमें दिखा देता है।
भाग्य से, संयोग से कुछ नहीं होता। आप अपने कर्मों से अपना भाग्य खुद बनाते हैं। वह कर्म है।

सफल होना चाहते हो तो फल की नहीं , अपने कर्म की चिंता करनी होगी।
अच्छे कर्म और अच्छी बातें एक दिन , आपके पास ज़रूर वापिस आती है।
भगवान भी उन्ही का साथ देता है, जिनके साथ उनके अच्छे कर्म होते हैं।

कर्म का सब खेल है यह लौट कर तो आएगा
जो आज तुझे रुला रहा कल, कोई और उसे रुलाएगा
ईश्वर ना दंड देता है ना माफ़ करता है,
कर्म का फल हमारे सुख दुःख का कारण बनता है।
जब आप कुछ बुरा करते हैं,
तो यह बाद में आपके पास आता है।
दिलों में खोट है, जुबान से प्यार करते है,
बहुत से लोग दुनिया में यही व्यापार करते है।
हमने जो कर्म किए हैं, उसका परिणाम हमारे पास आता ही जाता है,
आज,कल,सौ साल बाद,
या फिर सौ जन्म के बाद।
व्यक्ति की सफलता का कारण उसका भाग्य नहीं अपितु उसके कर्म होते हैं।

भाग्य से, संयोग से कुछ नहीं होता। आप अपने कर्मों से अपना भाग्य खुद बनाते हैं। वह कर्म है।
भगवान भी उन्ही का साथ देता है, जिनके साथ उनके अच्छे कर्म होते हैं।
